एलो वेरा, ग्वारपाठा या क्वारगंदल या घृतकुमारी - एक आयुर्वेदिक औषधि

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एलो वेरा या ग्वारपाठा या घृतकुमारी एक आयुर्वेदिक औषधि है , इसका उपयोग विभिन्न प्रकार की आयुर्वेदिक दवाईयों को बनाने में किया जाता है

एलो वेरा क्या है ?

एलो वेरा या घृतकुमारी जिसे क्वारगंदल या ग्वारपाठा के नाम से भी जाना जाता है | यह एक औषधीय पौधे के रूप में विश्व प्रसिद्द है | इसकी उत्पत्ति संभवतः उत्तरी अफ्रीका में हुयी थी | यह प्रजाति विश्व के अन्य स्थानों में पायी जाती है | इसकी निकट सम्बन्धी अलो उत्तरी अफ्रीका में पाए जाते हैं | इसको सभी सभ्यताओं ने एक औषधीय पौधे के रूप में मान्यता दिया है और इस प्रजाति के पौधे का इस्तेमाल पहली शताब्दी ईस्वी से औषधि के रूप में किया जा रहा है | इसका उल्लेख आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों में मिलता है |

एलो वेरा का इतिहास

एलो वेरा का मूल उद्गम स्थल उत्तरी अफ्रीका है | भारत में एलो वेरा विभिन्न रास्तों से होता हुआ सत्रहवीं शताब्दी में पंहुचा था | विश्व भर में एलो वेरा की २७५ किस्म की प्रजातियां पायी जाती है |

एलो वेरा के सेवन के फायदे

आयुर्वेद में कुछ ऐसी औषधियों के वर्णन किया गया है जिनका सेवन करने से ताउम्र हर तरह की बीमारी से बच सकते हैं | बस इनको सेवन करने के विधि के बारे में आपको पता होना चाहिए | ग्वारपाठा भी एक ऐसी औषधि है | ग्वारपाठा या घृतकुमारी या एलो वेरा आपकी त्वचा के लिए जितना उपयोगी है उतना ही लाभकारी आपकी सेहत के लिए भी है | हम सभी चाहते हैं की हमारा शरीर निरोग हो, सूंदर हो तो प्राकृतिक औषधियों में एलो वेरा एक ऐसी औषधि है जिसका नियमित रूप से सेवन करने से किसी प्रकार की बीमारी आपके शरीर पर हावी नहीं हो सकता है |

क्यों खाना चाहिए एलो वेरा ?

एलो वेरा को सर्वगुण संपन्न पौधा कहा जाता है क्योकि आपकी सेहत से जुडी कोई भी समस्या हो या सौंदर्य से जुडी समस्या | हर प्रकार की बीमारी को जड़ से ख़त्म करने का गुण इस पौधे में पाया जाता है | शायद इसी वजह से मिस्र की प्राचीन सभ्यता में घृतकुमारी को अमरता प्रदान करने वाला पौधा कहा जाता है | एलो वेरा में एंटी बैक्टीरियल, एंटी फंगल और एंटी माइक्रोबियल तत्व पाया जाता है | यही कारण है की कोई भी बीमारी ऊपरी त्वचा से जुडी या शरीर के अंदुरुनी हिस्सों से जुडी हो, एलो वेरा खाने का फायदा हर अंग को मिलता है | अपने दैनिक जीवन में आप खान पान और लाइफ स्टाइल से सम्बंधित कई भूल कर जाते हैं | जिस कारण कभी दांत दर्द, पेट दर्द, कब्ज, अपच, उल्टी, दस्त, सिरदर्द जैसी समस्या हो जाती है लेकिन अगर आप हर दिन एलो वेरा जूस या इसके गूदे का सेवन करेंगे तो आपको इन समस्या से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जायेगा |

एलो वेरा का सेवन करने से मनुष्य को कभी भी डाइबिटीज़, हाई कोलेस्ट्रॉल, हाइपर टेंशन जैसे गंभीर बिमारियों का सेवन नहीं करना पड़ता है क्योकि एलो वेरा का सही प्रकार से सेवन करने पर आपके शरीर में कोई विकार नहीं पनप सकता है | अगर आपके पेट और सीने में तेज जलन हो रहा है तो एक एलो वेरा के पत्ते को छील कर उसके गूदे के साथ थोड़ा शहद मिला सेवन करने से इन बिमारियों से छुटकारा मिल जायेगा | पेट दर्द होने की स्थिति में ग्वारपाठा के गूदे के साथ चीनी मिलकर खाने से पेट दर्द ठीक हो जाता है | त्वचा के जलने पर भी एलो वेरा के गूदे के लगा देने से जलन तुरंत कम हो जायेगा, फफोले कम पड़ेंगे और जले हुए का निशान भी नहीं पड़ेगा | एलो वेरा का सेवन करने से किसी भी प्रकार का हानि नहीं होगा | इसका सीमित मात्रा में सेवन करना चाहिए |

सौंदर्य प्रसाधन के रूप में एलो वेरा

घृतकुमारी के अर्क का प्रयोग बड़े स्तर पर सौंदर्य प्रसाधन और वैकल्पिक औषधि उद्योग जैसे चिरयौवनकारी, त्वचा को युवा रखने वाले क्रीम, आरोग्य या सुखदायक के रूप में प्रयोग किया जाता है लेकिन घृतकुमारी के औषधीय प्रयोजनों के प्रभावों की पुष्टि के लिए बहुत कम ही वैज्ञानिक साक्ष्य मौजूद हैं | और अक्सर एक अध्धयन दूसरे अध्धयन का काट करता हुआ प्रतीत होता है | इन सबके वावजूद कुछ प्रारंभिक सबूत हैं की घृतकुमारी मधुमेह के इलाज में काफी उपयोगी होता है मानव रक्त में लिपिड का स्तर काफी घटा देता है | ऐसा माना जाता है की इसका सकारात्मक प्रभाव इसमें मौजूद मन्नास इंट्राकुनैनेज और लेक्टिन जैसे यौगिक के कारण होता है | डॉ ए पी जैन ने एलो वेरा और मशरुम को मिला कर एक कैप्सूल तैयार किये हैं जो एड्स के रोगियों के लिए बहुत कारगर है |

लेखिका का परिचय

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मैं बन्दना कुमारी पेशे से एक फिल्मकार हूँ| मुझे कहानियां लिखने का काफी शौक है|

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