अनंत चतुर्दशी व्रत क्यों मनाई जाती है?

अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान अनंत (विष्णु भगवान का अनंत रूप) की पूजा कर अनंत सूत्र बाँधने से व्यक्ति की हर तरह से रक्षा होती है और व्यक्ति का जीवन सुख समृद्धि से भर जाता है|

अनंत चतुर्दशी कब मनाया जाता है?

अनंत चतुर्दशी का पर्व भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है| इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ गणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन भी किया जाता है इस कारण से इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है| गणेश चतुर्थी के ग्यारहवें दिन अनंत चतुर्दशी का त्यौहार मनाया जाता है| धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस को चौदह वर्ष तक लगातार करने से मनुष्य को विष्णु लोक की प्राप्ति होती है|

अनंत चतुर्दशी व्रत पूजा विधि

अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनेक रूपों की पूजा की जाती है| भगवान विष्णु का एक नाम अनंत देव भी है| इस दिन सुबह सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान अनंत की पूजा की जाती है| इस पूजन में कलश की स्थापना करके भगवान विष्णु की तस्वीर सामने रख कर कलश पर अष्ट दल व फूल, कुश, धुप इत्यादि चढ़ाया जाता है| इसके बाद अनंत सूत्र को भगवान विष्णु के पास रखा जाता है इसके बाद पुरोहित अपने सभी यजमानों को अनंत भगवान की कथा सुनाते हैं| अंत में पुरोहित जी एक बर्तन में दूध, सुपारी और अनंत सूत्र डाल कर क्षीर मंथन करते हैं और यजमान से पूछते हैं कि अनंत भगवान मिले| कई बार मंथन के बाद जब यजमान बोलते हैं कि भगवान मिल गए तब आरती कर पूजा संपन्न होती है| इस दिन श्रद्धालु स्त्री और पुरुष उपवास भी रखते हैं और जो लोग उपवास नहीं रखते हैं वो भी अनंत पूजा के पश्चात् अनंत सूत्र बाँध कर प्रसाद ग्रहण करने के बाद ही भोजन करते हैं| अनंत सूत्र को महिलाएं अपने बायें हाथ पर और पुरुष अपने दाएं हाथ पर बांधते हैं| अनंत सूत्र बांधने के बाद यथाशक्ति ब्राह्मण को दक्षिणा एवं भोजन कराने के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं|

क्या है यह अनंत सूत्र? अनंत सूत्र से जुडी पौराणिक कथा

अनंत सूत्र लाल या पीले रेशम या कपास के धागे से बनाया जाता है इस सूत्र में चौदह गांठें लगायी जाती है| जिसके कारण इस पर्व को चौदस के नाम से भी जाना जाता है| मान्यता है कि एक बार कौण्डिल्य ऋषि की पत्नी ने इस सूत्र को सामान्य धागा समझ कर जला दिया था| जिसके बाद कौण्डिल्य ऋषि को बहुत दुखों का सामना करना पड़ा था| अपनी इस भूल का एहसास होने पर कौण्डिल्य ऋषि की पत्नी ने चौदह सालों तक अनंत चतुर्दशी का व्रत किया| जिसके बाद उनकी सारी समस्याएँ दूर हो गयी| इसके बाद अनंत सूत्र का महत्व बहुत अधिक बढ़ गया|

अनंत सूत्र की चौदह गांठों का अर्थ/महत्व क्या है?

मान्यता है कि भगवान ने चौदह लोक बनाये जिसमे सत्य, तप, जन, मह, स्वर्ग, भुवः, भू, अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल शामिल हैं| इन चौदह लोकों की रक्षा के लिए विष्णु भगवान ने अलग अलग चौदह अवतार लिये, इस लिये अनंत सूत्र में चौदह गांठे लगायी जाती है|

लेखिका का परिचय

मैं ज्योतिका, बेगूसराय से हूँ

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