नारद - एक आदर्श पत्रकार, समाचार, संवाद, संचार और सुचना के जनक

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नारद - एक आदर्श पत्रकार, समाचार, संवाद, संचार और सुचना के जनक| नारद - एक परिचय, आइये जानते हैं देवर्षि के बारे में:- देवर्षि नारद के बारे में आपने पुराणों में सुना होगा। देवर्षि नारद जी को समाचार के देवता के नाम से भी जाना जाता है ब्रह्मा जी के पुत्र थे। हिंदू शास्त्र में बताए गए कथनों के अनुसार ब्रह्मा जी के 6 पुत्र थे जिनमें से आखरी पुत्र नारद ऋषि थे। ब्रह्म ऋषि नारद ने कड़ी तपस्या के बाद ब्रह्म ऋषि का पद प्राप्त किया था। भगवान विष्णु के अनन्य भक्तों में से सर्वप्रथम नारद मुनि जी को माना जाता है। आज हम आपको देव ऋषि नारद के बारे में संपूर्ण विवरण विस्तार पूर्वक बताने जा रहे हैं।

कौन थे देवर्षि नारद?

देवर्षि नारद की उत्पत्ति धर्म के प्रचार और लोक कल्याण हेतु हुई थी। शास्त्रों के अनुसार उन्हें ईश्वर के मन के रूप में भी देखा जाता था। ईश्वर का एक ऐसा मन जो सभी युगों, सभी लोको, समस्त विधाओं, समाज के सभी वर्गों के बीच विद्यमान है और सदैव महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। नारद ऋषि का आदर देवताओं सहित सभी दानव भी किया करते थे। यदि कोई भी परामर्श देवताओं या दानवों को लेना होता था तो वह सदैव नारद ऋषि को ही याद करते थे।

श्रीमद्भागवत महापुराण के कथन अनुसार इस सृष्टि में भगवान ने देव ऋषि नारद के रूप में अपना तीसरा अवतार लिया था। नारद जी को ऋषि राज के नाम से भी जाना गया क्योंकि वह सभी मुनियों के मुख्य देवता भी हैं। वैसे तो सब ही भगवान की माया है परंतु ग्रंथों में ऐसा बताया जाता है कि देवर्षि नारद तीनों लोकों के ज्ञाता थे उन्हें वर्तमान, भूतकाल और भविष्य काल में क्या होने वाला है और क्या हो चुका है इन सभी बातों की पूरी जानकारी थी।

नारद ऋषि का व्यक्तित्व जीवन

ऐसा बताया गया है कि नारद ऋषि के पुत्र धर्म, पुलस्त्य, क्रतु, पुलह, प्रत्यूष, प्रभास और कश्यप इन सभी को देवर्षि का पद प्राप्त हुआ। आगे चलकर देवर्षि नारद के पुत्रों के भी पुत्र हुए जिनका नाम धर्म के पुत्र नर एवं नारायण, क्रतु के पुत्र बालखिल्यगन, पुलह के पुत्र कर्दम, पुलस्त्य के पुत्र कुबेर, प्रत्यूष के पुत्र अचल, कश्यप के पुत्र नारद और पर्वत देवर्षि माने गए। परंतु इन सभी के बीच जनसाधारण और लोकप्रिय देवर्षि के रूप में सिर्फ नारद जी को ही जाना जाता है।

क्योंकि पुराणों में बताया गया है कि नारद जी की जैसी प्रसिद्धि और किसी भी देवता अथवा उनके किसी भी पुत्र को प्राप्त नहीं हो पाई।

नारद जी को महाभारत के सभा पर्व के पांचवें अध्याय में छोटे से व्यक्तित्व परिचय के दौरान यह कहा गया है कि देवर्षि नारद वेद और उपनिषदों के बहुत बड़े ज्ञाता है। वे सभी देवताओं में सर्व बिजनी यह है जिन्हें इतिहास पुराणों और सभी विशेषज्ञों के साथ साथ पूर्व कल्पों आदि की संपूर्ण जानकारी है। ऐसा कोई भी विषय नहीं है जिसके बारे में नारद ऋषि को जानकारी ना हो।

देव ऋषि नारद ज्योतिष विद्या में भी महान ज्ञानी रहे हैं इसलिए उनकी इस ज्योतिष विद्या का बखान करने के लिए नारद पुराण ज्योतिष शास्त्र का निर्माण भी किया जा चुका है। जिसमें श्लोकों के जरिए ज्योतिष ज्ञान का संपूर्ण विवरण नारद जी द्वारा बताया गया है। ऐसा कहा जाता है पल भर में ही एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचने वाले देव ऋषि नारद प्राचीन काल में एक स्थान की खबर दूसरे स्थान तक पहुंचाने का काम किया करते थे।

इसलिए आज भी बहुत से लोग इधर की बात उधर करने वाले लोगों को देवर्षि नारद की उस ख्याति से संबोधित कर देते हैं। पुराना में ऐसा भी बताया गया है कि देवर्षि नारद दो घड़ी से ज्यादा कहीं पर नहीं रोक पाते थे ऐसा उनको श्राप था। ठीक उसी प्रकार आज के समय में देखा जाए तो इधर की बात उधर करने वाले लोग भी एक स्थान पर अधिक समय तक नहीं रुकते हैं। इसीलिए उनकी तुलना देवर्षि नारद से की जाती है।

हमारा उद्देश्य

जिस प्रकार देवर्षि नारद उस समय के समाचार पत्र के रूप में काम किया करते थे जिन्हें समाचार का देवता भी माना जाता है ठीक उसी प्रकार हमारा उद्देश्य भी आप तक सभी प्रकार के संवाद समाचार अथवा सूचना पहुंचाना है। इसके द्वारा आप अनेक विषयों में महत्वपूर्ण और संपूर्ण जानकारी प्राप्त करने में सक्षम हो सकेंगे।

लेखिका का परिचय

मैं चारु, मुझे बचपन से ही भारत की संस्कृति से बहुत लगाव है भारत की संस्कृति के बारे में जानना भारत के विभिन्न स्थानों पर घूमना मुझे बहुत पसंद है। मैं भारत के अब तक बहुत सारे स्थानों की यात्रा कर चुकी हूं मेरा अनुभव सिर्फ यही कहता है कि भारत एक ऐसा देश है जो इस पृथ्वी पर सबसे ज्यादा खूबसूरत है। आरंभ से ही पढ़ाई लिखाई में रुचि होने के कारण मैं बड़े होकर एक अध्यापिका बनी। मुझे लेख लिखने का भी बहुत ज्यादा शौक था इसीलिए आज मैं एक लेखिका भी हूं आज मै बहुत सारी ज्ञानवर्धक वेबसाइट के लिए विभिन्न प्रकार के लेख लिखना पसंद करती हूँ।

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