नीम - एक आयुर्वेदिक औषधि

नीम एक आयुर्वेदिक औषधि है | इसका उपयोग विभिन्न प्रकार की आयुर्वेदिक दवाईयों को बनाने में किया जाता है |

नीम कहाँ कहाँ पाया जाता है ?

नीम एक जीवनदायिनी वृक्ष है | नीम भारत के अलावा पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार, थाईलैंड, श्रीलंका आदि देशों में मुख्य रूप से पाया जाता है | विगत डेढ़ सौ वर्षों से यह भारतीय उपमहाद्वीप पार करते हुए अफ्रीका, दक्षिण पूर्व एशिया, दक्षिण एवं मध्य अमेरिका तथा दक्षिणी प्रशांत द्वीप के अनेक देशों में भी पहुंच चूका है |

नीम का उपयोग

आयुर्वेद में नीम को बहुत ही उपयोगी माना गया है | इसका स्वाद कड़वा होता है लेकिन इसके फायदे अनेक और अति प्रभावशाली हैं |

नीम के फायदे क्या हैं ?

नीम की छाल का लेप हर प्रकार के चर्म रोगों के लिए रामवाण औषधि है |
नीम का दातुन करने से दांत और मसूढ़े स्वस्थ रहते हैं |
नीम की पत्तियां चबाने से रक्तशोधन होता है और त्वचा विकार रहित और कांतिवान होती है |
नीम की पत्तियों को उबाल कर उसके पानी से नहाने से चर्म विकार दूर होता है |
नीम चेचक के उपचार में भी काफी सहायक है यह चेचक के विषाणु को फैलने से भी रोकता है |
नीम का तेल भी विभिन्न प्रकार के विकार को ठीक करने में काफी सहायक होता है |
नीम से बना हुआ लेप बालों में लगाने से बाल स्वस्थ होता है और बाल झरने की बीमारी भी दूर होती है |
नीम के पत्ते का रस को आँखों में डालने से आँख आने की बीमारी में लाभ मिलता है |
नीम के बीज का चूर्ण को गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से वबासीर की बीमारी में भी काफी लाभ मिलता है |

नीम के औषधीय गुण

भारतीय आयुर्वेद में नीम एक विशेष औषधि के रूप में वर्णित है | विशेष तौर पर इसका उपयोग मधुमेह में, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में, मुंह की बीमारी दूर करने में, विभिन्न चर्म रोग दूर करने में, खून साफ़ करने के लिए किया जाता है | प्राकृतिक रूप में उपलब्ध नीम सबसे बेहतर एंटी बायोटिक औषधि है |

नीम के विशेष फायदे क्या है ?

नीम मधुमेह की बीमारी में अत्यंत लाभदायक है | यह विषाणु नाशक एवं रक्त शोधक होता है | यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में काफी सहायक है | यह बुखार में भी लाभदायक है |
नीम त्वचा विकार में भी काफी लाभदायक है | यह चेचक जैसी बीमारी में भी काफी लाभदायक है | रक्त शोधक गुण होने के कारण यह अंदुरुनी शरीर के साथ साथ बाह्य त्वचा विकार तक फायदेमंद है | यह सभी प्रकार के व्याधियों को हरने वाला है | ऐसे मृत्युलोक का कल्पवृक्ष भी कहा जाता है |
नीम का उपयोग विभिन्न प्रकार के अंग्रेजी दवाइयों को बनाने में भी किया जाता है | नीम की जड़, छाल, पत्ती और बीज से विभिन्न प्रकार की दवाइयां बनायीं जाती है | नीम का पेड़ अन्य पेड़ों के अनुपात में काफी अधिक ऑक्सीजन देता है |

नीम का पेड़ क्यों पूजनीय है ?

शास्त्रों में नीम के पेड़ को शीतला माँ और माता दुर्गा का भी वृक्ष कहा गया है | नीम में रोग को नष्ट करने की अद्भुत क्षमता होती है | इसके नीमारी देवी के नाम से भी जाना जाता है | देवी मंदिरों में नीम का रोपण शुभकारक माना गया है | हिन्दू धर्म में इसका विधिपूर्वक पूजन भी किया जाता है | आज कल भी ग्रामीण क्षेत्रों में चेचक का दाग हटाने के लिए नीम के पेड़ का पूजन और पत्तियों का सेवन किया जाता है|
कीटाणु नाशक गुण होने के कारण इसे आर्गेनिक खेती करने में भी इस्तेमाल किया जाता है | हमेशा से ऐसा माना जाता रहा है की नीम के पेड़ पर देवियों का वास होता है | शनि के कोप से बचने के लिए नीम की लकड़ी से हवं करवाने से अतिशीघ्र लाभ मिलता है | नीम की लकड़ी पर बने हुए यन्त्र भी अत्यंत प्रभावशाली माने जाते हैं |

लेखिका का परिचय

priya bharti

मैं प्रिया भारती, गाँव - बदलपुरा, बेगूसराय से हूँ |

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