विश्वकर्मा पूजा क्या है ?

विश्वकर्मा यानी विश्व के निर्माण या सृजनकर्ता | विश्वकर्मा पूजा का त्यौहार भगवान श्री विश्वकर्मा जी के जन्म दिवस के रूप में मनाते हैं

विश्वकर्मा पूजा क्यों मनाते हैं?

विश्वकर्मा जी को विश्व का सबसे पहला इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है| इसलिए इस दिन उद्योगों, फैक्टरियों, मैकेनिक दुकानों और हर तरह की मशीन और औजारों की पूजा की जाती है, ताकि इस क्षेत्र में काम करने वाले कारीगर पुरे वर्ष अच्छे से काम धाम करते रहें| साथ में ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा अर्चना करने से कारोबार, व्यापर में खूब तरक्की होती है| घरों में भी लोग अपने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और मोटर गाड़ी की भी पूजा करते हैं| विश्वकर्मा पूजा के दिन स्कूल, कॉलेज, ऑफिस वगैरह में सरकारी छुट्टी रहती है|

विश्वकर्मा पूजा कब मनाया जाता है

पूर्वी भारत में विश्वकर्मा पूजा प्रतिवर्ष १७ सितम्बर को मनाया जाता है| जबकि पश्चमी भारत में विश्वकर्मा पूजा प्रतिवर्ष दिवाली के अगले दिन मनाया जाता है|

विश्वकर्मा पूजा की पूजा विधि

इस दिन साफ सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है| घर, दफ्तर, कल कारखानों के साथ साथ सभी औजारों को अच्छे से साफ़ करने के साथ साथ रंगाई और पुताई भी करते हैं| जिस जगह विश्वकर्मा पूजा मनाया जाने वाला होता है, उस जगह पर पंडाल तैयार करके खूब अच्छे से सजावट किया जाता है| पुरोहित जी को पूजा करवाने के लिए बुलाया जाता है| पूजा करने वाले अच्छे से नहा धोकर विश्वकर्मा जी की प्रतिमा और कलश स्थापित करते हैं| फिर धुप, डीप और अगरबत्ती जलाते हैं, फूल और फूलों की माला भी चढ़ाते हैं, प्रसाद के रूप में फल और मिठाई चढ़ाया जाता है विधिवत मंत्रोचार के साथ पूजा किया जाता है| अंत में हवन कर मंगल की कामना करते हैं और सभी लोगों में प्रसाद वितरण भी करते हैं| विभिन्न प्रकार के मनोरंजन कार्यकर्मों का भी आयोजन किया जाता है|

विश्वकर्मा भगवान की मूर्ति विसर्जन

विश्वकर्मा पूजा के दिन मिटटी से बने मूर्तियों को स्थापित किया जाता है| पुरे दिन और रत विश्वकर्मा पूजा का कार्यक्रम चलता रहता है फिर अगले दिन भगवान विश्वकर्मा की विदाई करके मूर्ति का विसर्जन किया जाता है| जिसमे सभी भक्ति भाव और श्रद्धा से शामिल होते हैं और एक दूसरे को अबीर और गुलाल लगाते हैं ख़ुशी से लोग झूमते, नाचते और गाते हुए भगवान की प्रतिमा को बड़ी गाड़ी में लेकर नगर भ्रमण करवाते हुए नजदीक के नदी या तालाब में विसर्जन के लिए ले जाते हैं, साथ की अन्य गाड़ियों पर मनमोहक धार्मिक झाकियां भी निकाली जाती है| इस तरह पुरे रास्ते भर लोगों को प्रसाद वितरित करते हुए नाचते गाते आगे बढ़ते हैं अंत में भगवान की प्रतिमा को जल में विसर्जित करते हैं|

विश्वकर्मा पूजा का महत्व

मनुष्य के जीवन में सदैव विश्वकर्मा पूजा का विशेष महत्व है| यदि मनुष्य के पास शिल्प का ज्ञान नहीं होता तो वह कोई भी भवन ईमारत नहीं बना पाता| इसलिए लोग वास्तुकला कौशल विकास के लिए आराधना करते हैं|

लेखिका का परिचय

मैं ज्योतिका, बेगूसराय से हूँ

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